कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
अर्थ / उपयोग:
सुबह जागने के बाद हथेलियों का दर्शन करते हुए पढ़ें।
प्रभात से रात्रि तक जीवन के प्रत्येक शुभ अवसर पर पढ़े जाने वाले मंत्र।
सामान्य मंत्र प्रातः, संध्या या पूजा के समय पढ़े जा सकते हैं। विशेष साधना में परंपरा और गुरु के निर्देश को प्राथमिकता दें।
दैनिक स्मरण के लिए 1, 3, 11 या 21 बार जप किया जा सकता है। अनुष्ठानिक संख्या योग्य आचार्य से पूछें।
हाँ। अर्थ समझने से मंत्र के भाव पर एकाग्रता बढ़ती है और पाठ अधिक सार्थक बनता है।