असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय॥
मृत्योर्मा अमृतं गमय॥
अर्थ / उपयोग:
असत्य से सत्य, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो।
सामान्य मंत्र प्रातः, संध्या या पूजा के समय पढ़े जा सकते हैं। विशेष साधना में परंपरा और गुरु के निर्देश को प्राथमिकता दें।
दैनिक स्मरण के लिए 1, 3, 11 या 21 बार जप किया जा सकता है। अनुष्ठानिक संख्या योग्य आचार्य से पूछें।
हाँ। अर्थ समझने से मंत्र के भाव पर एकाग्रता बढ़ती है और पाठ अधिक सार्थक बनता है।