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होम › नवरात्रि

शक्ति, श्रद्धा और साधना का पावन पर्व

सम्पूर्ण नवरात्रि महोत्सव

नौ दिनों की पूजा-विधि, माँ दुर्गा के नौ स्वरूप, व्रत नियम, दुर्गा पाठ, आरती, कथा, कन्या पूजन और हवन की संपूर्ण जानकारी एक ही स्थान पर।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

आज की पूजा देखें दुर्गा सप्तशती पढ़ें पूजा सामग्री सूची पाठ सुनें

सरल भाषा • चरणबद्ध पूजा-विधि • मोबाइल पर पढ़ें और सुनें

माँ दुर्गा

माँ दुर्गा की उपासना का पावन पर्व नवरात्रि हमें शक्ति, श्रद्धा, संयम और सकारात्मकता से भर देता है। नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना की जाती है।

हिन्दुत्व भारत के इस सम्पूर्ण नवरात्रि महोत्सव में आपको कलश स्थापना, दैनिक पूजा-विधि, नौ देवियों का परिचय, दुर्गा पाठ, मंत्र, आरती, व्रत नियम, कन्या पूजन, हवन, कथा और उपयोगी धार्मिक सामग्री सरल भाषा में एक ही स्थान पर मिलेगी।

अपनी पारिवारिक परंपरा, स्वास्थ्य और स्थानीय रीति का सम्मान करते हुए श्रद्धा के साथ माँ की आराधना करें।

जय माता दी!

आज की नवरात्रि पूजा

माँ शैलपुत्री

आज नवरात्रि का प्रथम दिन है

आज माँ शैलपुत्री की आराधना की जाती है। श्रद्धा और शुद्ध भाव से पूजा कर माता को पुष्प, अक्षत, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

  • आज की देवी: माँ शैलपुत्री
  • आज का भोग: घी
  • आज का रंग: श्वेत / गुलाबी (परंपरा अनुसार)
  • मुख्य मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
पूरी पूजा-विधि मंत्र सुनें देवी की कथा आरती पढ़ें

रंग, भोग, तिथि और पूजा-पद्धति क्षेत्रीय एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है।

त्वरित नेविगेशन

  • 🪔 पूजा-विधि प्रातः तैयारी से आरती और प्रसाद तक सम्पूर्ण नवरात्रि पूजा चरणबद्ध रूप में।
  • 🏺 कलश स्थापना पूजा सामग्री, शुभ स्थान, स्थापना क्रम, मंत्र और विसर्जन की सरल जानकारी।
  • 🌺 नौ देवियाँ नवरात्रि के नौ दिनों में पूजित माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों का परिचय।
  • 📖 दुर्गा पाठ दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, अर्गला, कीलक, कुंजिका स्तोत्र और अन्य पवित्र पाठ।
  • 🎵 मंत्र और आरती दैनिक मंत्र, स्तोत्र, चालीसा, आरती और उच्चारण सहित audio।
  • 🥗 व्रत मार्गदर्शन व्रत नियम, फलाहार सामग्री, सरल recipes और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियाँ।
  • 🙏 कन्या पूजन अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन की तैयारी, विधि और आवश्यक सामग्री।
  • 🔥 हवन विधि हवन की तैयारी, सामग्री, संकल्प, आहुति और पूर्णाहुति का सामान्य मार्गदर्शन।

नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूप

प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के एक दिव्य स्वरूप की आराधना की जाती है। विस्तृत पृष्ठ आगामी चरण में उपलब्ध होंगे।

प्रथम दिन

माँ शैलपुत्री

पर्वतराज हिमालय की पुत्री — स्थिरता, पवित्रता और नई शुरुआत का प्रतीक।

  • मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
  • भोग: घी
  • रंग: श्वेत / गुलाबी (परंपरा अनुसार)
पूजा-विधि देखें
द्वितीय दिन

माँ ब्रह्मचारिणी

तप, संयम, त्याग और साधना का स्वरूप।

  • मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
  • भोग: चीनी / मिश्री
  • रंग: लाल / नीला (परंपरा अनुसार)
पूजा-विधि देखें
तृतीय दिन

माँ चंद्रघंटा

साहस, शांति और रक्षा का स्वरूप।

  • मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
  • भोग: दूध / मिष्ठान्न
  • रंग: नीला / पीला (परंपरा अनुसार)
पूजा-विधि देखें
चतुर्थ दिन

माँ कूष्मांडा

सृष्टि, ऊर्जा और तेज का स्वरूप।

  • मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
  • भोग: मालपुआ / कद्दू
  • रंग: नारंगी / हरा (परंपरा अनुसार)
पूजा-विधि देखें
पंचम दिन

माँ स्कंदमाता

मातृत्व, करुणा और संरक्षण का स्वरूप।

  • मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
  • भोग: केला
  • रंग: धूम्र / स्लेटी (परंपरा अनुसार)
पूजा-विधि देखें
षष्ठ दिन

माँ कात्यायनी

शक्ति, न्याय और साहस का स्वरूप।

  • मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
  • भोग: शहद
  • रंग: रक्त / लाल (परंपरा अनुसार)
पूजा-विधि देखें
सप्तम दिन

माँ कालरात्रि

भय और नकारात्मकता का नाश करने वाली।

  • मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
  • भोग: गुड़
  • रंग: श्वेत / नीला (परंपरा अनुसार)
पूजा-विधि देखें
अष्टम दिन

माँ महागौरी

शांति, पवित्रता और सौम्यता का स्वरूप।

  • मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
  • भोग: नारियल
  • रंग: गुलाबी / पीला (परंपरा अनुसार)
पूजा-विधि देखें
नवम दिन

माँ सिद्धिदात्री

सिद्धि, पूर्णता और आध्यात्मिक कृपा का स्वरूप।

  • मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
  • भोग: तिल / मिष्ठान्न
  • रंग: बैंगनी / सुनहरा (परंपरा अनुसार)
पूजा-विधि देखें

सम्पूर्ण नवरात्रि पूजा-विधि

नवरात्रि की पूजा श्रद्धा, शुद्धता और नियमित साधना का पर्व है। नीचे दी गई विधि सामान्य घरेलू पूजा के लिए सरल मार्गदर्शन है। परिवार, क्षेत्र और गुरु-परंपरा के अनुसार पूजा-पद्धति में अंतर हो सकता है।

पूजा से पहले की तैयारी

  • घर और पूजा-स्थान की सफाई करें।
  • पूजा के लिए स्वच्छ और शांत स्थान चुनें।
  • माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पूजा चौकी पर लाल या पीला स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ।
  • पूजा सामग्री पहले से व्यवस्थित रखें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार व्रत या सात्त्विक भोजन का संकल्प लें।
  • पूजा के समय मोबाइल notifications बंद रखें।
सामान्य पूजा सामग्री
  • माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र
  • पूजा चौकी
  • लाल या पीला वस्त्र
  • कलश
  • स्वच्छ जल
  • नारियल
  • आम या पान के पत्ते
  • मौली
  • रोली
  • कुमकुम
  • हल्दी
  • अक्षत
  • पुष्प
  • पुष्पमाला
  • धूप
  • दीपक
  • घी या तेल
  • रुई की बत्ती
  • फल
  • मिठाई
  • नैवेद्य
  • पान
  • सुपारी
  • लौंग
  • इलायची
  • कपूर
  • दक्षिणा
  • जौ बोने के लिए पात्र और मिट्टी
  • हवन सामग्री, यदि हवन करना हो
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    स्नान और शुद्ध वस्त्र

    प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मन को शांत करें और पूजा स्थान पर बैठें।

  2. 2

    पूजा स्थान की शुद्धि

    पूजा स्थान पर स्वच्छ जल या गंगाजल का छिड़काव करें। दीपक और धूप प्रज्वलित करें।

  3. 3

    आचमन और संकल्प

    ईश्वर का स्मरण कर नवरात्रि पूजा, व्रत या पाठ का संकल्प लें। संकल्प अपनी भाषा में भी किया जा सकता है।

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    गणेश पूजन

    पूजा के प्रारंभ में श्री गणेश का स्मरण करें और निर्विघ्न पूजा की प्रार्थना करें।

  5. 5

    कलश स्थापना

    कलश में स्वच्छ जल, अक्षत और पूजनीय सामग्री रखें। ऊपर पत्ते और नारियल स्थापित करें। कलश के पास जौ बोने की परंपरा हो तो मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ।

  6. 6

    माँ दुर्गा का आवाहन

    माँ दुर्गा का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक आवाहन करें। लाल पुष्प, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें।

  7. 7

    देवी का पूजन

    माता को वस्त्र, पुष्प, रोली, अक्षत, धूप, दीप, फल और नैवेद्य अर्पित करें। सामग्री उपलब्ध न हो तो भावपूर्वक पुष्प और जल से भी पूजा की जा सकती है।

  8. 8

    मंत्र जप

    ॐ दुं दुर्गायै नमः॥ — या दिन विशेष की देवी का मंत्र जपें।

  9. 9

    पाठ

    श्रद्धा और समय के अनुसार दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, अर्गला, कीलक, सिद्ध कुंजिका, दुर्गा चालीसा, देवी सूक्त या दुर्गा नामावली का पाठ करें।

  10. 10

    आरती

    माँ दुर्गा की आरती करें और परिवार सहित प्रार्थना करें।

  11. 11

    क्षमा प्रार्थना

    पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए विनम्रतापूर्वक क्षमा माँगें।

  12. 12

    प्रसाद

    माता को अर्पित नैवेद्य को प्रसाद के रूप में श्रद्धापूर्वक ग्रहण और वितरित करें।

कलश स्थापना

कलश स्थापना नवरात्रि पूजा का महत्वपूर्ण आरंभिक अनुष्ठान माना जाता है। यह शक्ति और शुभता का प्रतीक है।

स्थापना क्रम

  1. पूजा स्थान स्वच्छ करें और चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएँ।
  2. कलश में स्वच्छ जल, अक्षत, सुपारी और सिक्का रखें।
  3. कलश के मुख पर आम/पान के पत्ते और नारियल स्थापित करें। मौली बाँधें।
  4. परंपरा अनुसार जौ बोएँ और दीप प्रज्वलित करें।
  5. माँ दुर्गा का आवाहन कर पूजा आरंभ करें।

सामग्री checklist

कलश स्थापना की विधि, दिशा, सामग्री और मंत्र विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में अलग हो सकते हैं। अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।

दुर्गा पाठ एवं धार्मिक पुस्तकालय

नीचे दिया गया पाठ-विभाजन सामान्य मार्गदर्शन है। परंपरा के अनुसार अध्याय-क्रम भिन्न हो सकता है। पूर्ण पाठक (reader) आगामी चरण में उपलब्ध होगा।

प्रगति: 0%

पाठ-विभाजन गुरु-परंपरा और समय की सुविधा के अनुसार बदल सकता है।

नवरात्रि व्रत मार्गदर्शन

नवरात्रि व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि संयम, सात्त्विकता, जप, ध्यान और सकारात्मक आचरण भी है। व्रत की विधि परिवार, क्षेत्र और स्वास्थ्य के अनुसार भिन्न हो सकती है।

मधुमेह, गर्भावस्था, किडनी या हृदय संबंधी बीमारी, कमजोरी, बच्चों, बुजुर्गों या नियमित दवा लेने वाले व्यक्तियों को उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। स्वास्थ्य को हानि पहुँचाने वाला व्रत न करें।

कन्या पूजन

अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन अनेक परिवारों में शक्ति के बाल स्वरूप के सम्मान के रूप में किया जाता है। इस अनुष्ठान का मूल भाव सम्मान, स्नेह, शुद्धता और सेवा है।

बच्चों की सुरक्षा और सहमति अनिवार्य है। जबरदस्ती स्पर्श, असुरक्षित अग्नि, भोजन का दबाव या अभिभावक की अनुमति के बिना फोटो न लें।

हवन विधि

हवन अग्नि से जुड़ा अनुष्ठान है। जटिल वैदिक हवन योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में करना उचित है।

हवन खुले, हवादार और सुरक्षित स्थान पर करें। बच्चों, बुजुर्गों, पालतू पशुओं और ज्वलनशील वस्तुओं को सुरक्षित दूरी पर रखें।

मंत्र, आरती और ऑडियो

जय अम्बे गौरी, दुर्गा चालीसा, सर्वमंगल मांगल्ये, या देवी सर्वभूतेषु और दैनिक मंत्र जल्द audio सहित उपलब्ध होंगे। अभी आप संबंधित आरती पृष्ठ देख सकते हैं।

दुर्गा आरती दुर्गा चालीसा

त्योहार कैलेंडर और पंचांग

आज की विस्तृत पंचांग जानकारी अभी अपडेट की जा रही है। कृपया सामान्य पूजा मार्गदर्शन देखें।

रंग, भोग, तिथि और पूजा-पद्धति क्षेत्रीय एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की आराधना की जाती है।

हाँ। श्रद्धा, सात्त्विक आचरण, प्रार्थना और नियमित पूजा मुख्य भाव हैं। स्वास्थ्य या अन्य कारणों से व्रत न कर पाने पर सामान्य सात्त्विक भोजन के साथ पूजा की जा सकती है।

नहीं। समय और परंपरा के अनुसार संक्षिप्त पाठ, दुर्गा चालीसा, देवी कवच, मंत्र जप या अध्यायवार पाठ किया जा सकता है।

माँ दुर्गा के चित्र या प्रतिमा के सामने दीप, पुष्प, जल और नैवेद्य अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।

यह अनेक परिवारों की परंपरा है, लेकिन अनिवार्य नहीं। यदि अखंड ज्योति रखें तो अग्नि सुरक्षा और नियमित देखभाल अत्यंत आवश्यक है।

अनेक परंपराओं में सेंधा नमक उपयोग किया जाता है। परिवार की परंपरा और स्वास्थ्य आवश्यकताओं को प्राथमिकता दें।

दोनों दिनों में अलग-अलग पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराएँ प्रचलित हैं। अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय आचार्य के मार्गदर्शन का पालन करें।

हाँ। सरल मंत्र, चालीसा, आरती और अर्थ सहित छोटे पाठ बच्चों को श्रद्धा और सही उच्चारण के साथ सिखाए जा सकते हैं।

पूजा का मूल भाव श्रद्धा है। उपलब्ध सामग्री से स्वच्छता और भक्ति के साथ पूजा करें।

Audio सुनना श्रद्धा और सीखने के लिए उपयोगी है। औपचारिक अनुष्ठान संबंधी नियम परंपरा और गुरु-मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

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माँ दुर्गा की कृपा आपके जीवन में शक्ति, शांति और सद्बुद्धि भर दे

नवरात्रि के प्रत्येक दिन श्रद्धा, संयम और सेवा का संकल्प लें। पूजा का सबसे सुंदर रूप है—शुद्ध भाव, सदाचार और दूसरों के प्रति करुणा।

आज की पूजा शुरू करें दुर्गा पाठ पढ़ें

जय माता दी

धार्मिक सूचना: इस वेबसाइट पर दी गई पूजा-विधि सामान्य जानकारी और श्रद्धापूर्ण मार्गदर्शन के उद्देश्य से है। मंत्र, अनुष्ठान, तिथि, भोग, रंग और पूजा-पद्धति परिवार, क्षेत्र, संप्रदाय और गुरु-परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है। विशेष या जटिल अनुष्ठान के लिए योग्य आचार्य से मार्गदर्शन लें।

स्वास्थ्य एवं सुरक्षा: व्रत अपनी आयु, स्वास्थ्य और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार करें। अग्नि, दीपक, धूप और हवन का उपयोग सावधानी से करें। बच्चों को अग्नि के पास अकेला न छोड़ें।

कॉपीराइट सूचना: केवल स्वयं निर्मित, सार्वजनिक डोमेन या विधिवत लाइसेंस प्राप्त धार्मिक पाठ, audio, चित्र और PDF प्रकाशित करें।

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