स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। अर्थ / उपयोग: सर्वकल्याण और मंगल की वैदिक कामना। ← वैदिक मंत्र एवं सूक्त