मंत्र पूजा एवं संस्कार मंत्र पवित्रीकरण मंत्र
02

पवित्रीकरण मंत्र

अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
अर्थ / उपयोग: बाहरी और आंतरिक शुद्धि की भावना।

← पूजा एवं संस्कार मंत्र