अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥ अर्थ / उपयोग: अन्न, संतोष और ज्ञान की प्रार्थना। ← अन्य देवी मंत्र